Real Facts of Life - Enjoy
Some Interesting and Amazing Facts of India and World
Sunday, February 14, 2016
Saturday, February 5, 2011
गब्बर सिंह का चरित्र चित्रण
1. सादा जीवन , उच्च विचार : उसके जीने का ढंग बड़ा सरल था . पुराने और मैले कपड़े , बढ़ी हुई दाढ़ी , महीनों से जंग खाते दांत और पहाड़ों पर खानाबदोश जीवन . जैसे मध्यकालीन भारत का फकीर हो . जीवन में अपने लक्ष्य की ओर इतना समर्पित कि ऐशो - आराम और विलासिता के लिए एक पल की भी फुर्सत नहीं . और विचारों में उत्कृष्टता के क्या कहने ! ' जो डर गया , सो मर गया ' जैसे संवादों से उसने जीवन की क्षणभंगुरता पर प्रकाश डाला था .
२ . दयालु प्रवृत्ति : ठाकुर ने उसे अपने हाथों से पकड़ा था . इसलिए उसने ठाकुर के सिर्फ हाथों को सज़ा दी . अगर वो चाहता तो गर्दन भी काट सकता था . पर उसके ममतापूर्ण और करुणामय ह्रदय ने उसे ऐसा करने से रोक दिया .
3. नृत्य - संगीत का शौकीन : ' महबूबा ओये महबूबा ' गीत के समय उसके कलाकार ह्रदय का परिचय मिलता है . अन्य डाकुओं की तरह उसका ह्रदय शुष्क नहीं था . वह जीवन में नृत्य - संगीत एवंकला के महत्त्व को समझता था . बसन्ती को पकड़ने के बाद उसके मन का नृत्यप्रेमी फिर से जाग उठा था . उसने बसन्ती के अन्दर छुपी नर्तकी को एक पल में पहचान लिया था . गौरतलब यह कि कला के प्रति अपने प्रेम को अभिव्यक्त करने का वह कोई अवसर नहीं छोड़ता था .
4. अनुशासनप्रिय नायक : जब कालिया और उसके दोस्त अपने प्रोजेक्ट से नाकाम होकर लौटे तो उसने कतई ढीलाई नहीं बरती . अनुशासन के प्रति अपने अगाध समर्पण को दर्शाते हुए उसने उन्हें तुरंत सज़ा दी .
5. हास्य - रस का प्रेमी : उसमें गज़ब का सेन्स ऑफ ह्यूमर था . कालिया और उसके दो दोस्तों को मारने से पहले उसने उन तीनों को खूब हंसाया था . ताकि वो हंसते - हंसते दुनिया को अलविदा कह सकें . वह आधुनिक यु का ' लाफिंग बुद्धा ' था .
6. नारी के प्रति सम्मान : बसन्ती जैसी सुन्दर नारी का अपहरण करने के बाद उसने उससे एक नृत्य का निवेदन किया . आज - कल का खलनायक होता तो शायद कुछ और करता .
7. भिक्षुक जीवन : उसने हिन्दू धर्म और महात्मा बुद्ध द्वारा दिखाए गए भिक्षुक जीवन के रास्ते को अपनाया था . रामपुर और अन्य गाँवों से उसे जो भी सूखा - कच्चा अनाज मिलता था , वो उसी से अपनी गुजर - बसर करता था . सोना , चांदी , बिरयानी या चिकन मलाई टिक्का की उसने कभी इच्छा ज़ाहिर नहीं की .
8. सामाजिक कार्य : डकैती के पेशे के अलावा वो छोटे बच्चों को सुलाने का भी काम करता था . सैकड़ों माताएं उसका नाम लेती थीं ताकि बच्चे बिना कलह किए सो जाएं . सरकार ने उसपर 50,000 रुपयों का इनाम घोषित कर रखा था . उस युग में ' कौन बनेगा करोड़पति ' ना होने के बावजूद लोगों को रातों - रात अमीर बनाने का गब्बर का यह सच्चा प्रयास था .
9. महानायकों का निर्माता : अगर गब्बर नहीं होता तो जय और व ?? रू जैसे लुच्चे - लफंगे छोटी - मोटी चोरियां करते हुए स्वर्ग सिधार जाते . पर यह गब्बर के व्यक्तित्व का प्रताप था कि उन लफंगों में भी महानायक बनने की क्षमता जागी .
२ . दयालु प्रवृत्ति : ठाकुर ने उसे अपने हाथों से पकड़ा था . इसलिए उसने ठाकुर के सिर्फ हाथों को सज़ा दी . अगर वो चाहता तो गर्दन भी काट सकता था . पर उसके ममतापूर्ण और करुणामय ह्रदय ने उसे ऐसा करने से रोक दिया .
3. नृत्य - संगीत का शौकीन : ' महबूबा ओये महबूबा ' गीत के समय उसके कलाकार ह्रदय का परिचय मिलता है . अन्य डाकुओं की तरह उसका ह्रदय शुष्क नहीं था . वह जीवन में नृत्य - संगीत एवंकला के महत्त्व को समझता था . बसन्ती को पकड़ने के बाद उसके मन का नृत्यप्रेमी फिर से जाग उठा था . उसने बसन्ती के अन्दर छुपी नर्तकी को एक पल में पहचान लिया था . गौरतलब यह कि कला के प्रति अपने प्रेम को अभिव्यक्त करने का वह कोई अवसर नहीं छोड़ता था .
4. अनुशासनप्रिय नायक : जब कालिया और उसके दोस्त अपने प्रोजेक्ट से नाकाम होकर लौटे तो उसने कतई ढीलाई नहीं बरती . अनुशासन के प्रति अपने अगाध समर्पण को दर्शाते हुए उसने उन्हें तुरंत सज़ा दी .
5. हास्य - रस का प्रेमी : उसमें गज़ब का सेन्स ऑफ ह्यूमर था . कालिया और उसके दो दोस्तों को मारने से पहले उसने उन तीनों को खूब हंसाया था . ताकि वो हंसते - हंसते दुनिया को अलविदा कह सकें . वह आधुनिक यु का ' लाफिंग बुद्धा ' था .
6. नारी के प्रति सम्मान : बसन्ती जैसी सुन्दर नारी का अपहरण करने के बाद उसने उससे एक नृत्य का निवेदन किया . आज - कल का खलनायक होता तो शायद कुछ और करता .
7. भिक्षुक जीवन : उसने हिन्दू धर्म और महात्मा बुद्ध द्वारा दिखाए गए भिक्षुक जीवन के रास्ते को अपनाया था . रामपुर और अन्य गाँवों से उसे जो भी सूखा - कच्चा अनाज मिलता था , वो उसी से अपनी गुजर - बसर करता था . सोना , चांदी , बिरयानी या चिकन मलाई टिक्का की उसने कभी इच्छा ज़ाहिर नहीं की .
8. सामाजिक कार्य : डकैती के पेशे के अलावा वो छोटे बच्चों को सुलाने का भी काम करता था . सैकड़ों माताएं उसका नाम लेती थीं ताकि बच्चे बिना कलह किए सो जाएं . सरकार ने उसपर 50,000 रुपयों का इनाम घोषित कर रखा था . उस युग में ' कौन बनेगा करोड़पति ' ना होने के बावजूद लोगों को रातों - रात अमीर बनाने का गब्बर का यह सच्चा प्रयास था .
9. महानायकों का निर्माता : अगर गब्बर नहीं होता तो जय और व ?? रू जैसे लुच्चे - लफंगे छोटी - मोटी चोरियां करते हुए स्वर्ग सिधार जाते . पर यह गब्बर के व्यक्तित्व का प्रताप था कि उन लफंगों में भी महानायक बनने की क्षमता जागी .
Friday, September 17, 2010
Our Long life Explained
On the first day, God created the dog and said:
'Sit all day by the door of your house and bark at anyone who comes in or walks past. For this, I will give you a life span of twenty years.'
'Sit all day by the door of your house and bark at anyone who comes in or walks past. For this, I will give you a life span of twenty years.'
The dog said: 'That's a long time to be barking. How about only ten years and I'll give you back the other ten?'
God agreed.
On the second day, God created the monkey and said:
'Entertain people, do tricks, and make them laugh. For this, I'll give you a twenty-year life span.'
The monkey said: 'Monkey tricks for twenty years? That's a pretty long time to perform. How about I give you back ten like the Dog did?'
God agreed.
On the third day, God created the cow and said:
'You must go into the field with the farmer all day long and suffer under the sun, have calves and give milk to support the farmer's family. For this, I will give you a life span of sixty years.'
The cow said: 'That's kind of a tough life you want me to live for sixty years.. How about twenty and I'll give back the other forty?'
'You must go into the field with the farmer all day long and suffer under the sun, have calves and give milk to support the farmer's family. For this, I will give you a life span of sixty years.'
The cow said: 'That's kind of a tough life you want me to live for sixty years.. How about twenty and I'll give back the other forty?'
God agreed again.
On the fourth day, God created humans and said:
'Eat, sleep, play, marry and enjoy your life. For this, I'll give you twenty years.'
As we all know human is a greedy creature… so he replied: 'Only twenty years? Could you possibly give me my twenty, the forty the cow gave back, the ten the monkey gave back, and the ten the dog gave back; that makes eighty, okay?'
‘Okay,' said God, “You asked for it.. so from now on you have live life of all…”
That is why -
· For our first twenty years we eat, sleep, play and enjoy ourselves. On the fourth day, God created humans and said:
'Eat, sleep, play, marry and enjoy your life. For this, I'll give you twenty years.'
As we all know human is a greedy creature… so he replied: 'Only twenty years? Could you possibly give me my twenty, the forty the cow gave back, the ten the monkey gave back, and the ten the dog gave back; that makes eighty, okay?'
‘Okay,' said God, “You asked for it.. so from now on you have live life of all…”
That is why -
· For the next forty years we slave in the sun to support our family.
· For the next ten years we do monkey tricks to entertain the grandchildren.
· For the last ten years we sit on the front porch and bark at everyone.
Thursday, September 9, 2010
Wednesday, September 8, 2010
BACHPAN KA ZAMANA HOTA THA......
BACHPAN KA ZAMANA HOTA THA,
Khushiyo ka khazana hota tha,
Chahat chand ko pane ki,
Dil titli ka deewana hota tha,
Khabar na thi kuch subah ki,
Na shyam ka thikana hota tha,
Thak haar kar aana school se,
par khelne bhi jana hota tha,
Daadi ki kahani hoti thi,
or pariyo ka fasana hota tha,
Baarish me kaagaz ki kashti thi,
har mosum suhana hota tha,
Har khel me saathi hote the,
har rishta nibhana hota tha,
Papa ki wo Daate galti par,
Mummy ka manana hota tha,
Gum ki jubaan na hoti thi,
na zakhmo ka paimana hota tha,
Rone ki wajah na hoti thi,
na hasne ka bahana hota tha,
Par ab nahi rahi wo Zindagi,
Jesa BACHPAN KA ZAMANA HOTA THA!!
Monday, June 21, 2010
थम सा गया है ज़िन्दगी में
थम सा गया है ज़िन्दगी में, सिलसिला कशमकश का टूटता नही है....
कभी वोह पराया सा महसूस होता है,
और कभी ग़ैर लगता नही है...
मैं ख़ुशी पाने कि चाह में तनहा हु
या तनहाई में ही खुश हूँ
उलझ गया है यह सवाल सुलझता नही है.....
इस क़दर खो गयी हु मैं दुनिया कि भीड़ में,
अब ढूंढे से भी मंजिल का पता मिलता नही है......
कभी वोह पराया सा महसूस होता है,
और कभी ग़ैर लगता नही है...
मैं ख़ुशी पाने कि चाह में तनहा हु
या तनहाई में ही खुश हूँ
उलझ गया है यह सवाल सुलझता नही है.....
इस क़दर खो गयी हु मैं दुनिया कि भीड़ में,
अब ढूंढे से भी मंजिल का पता मिलता नही है......
बातें करके रुला ना दीजिएगा...
बातें करके रुला ना दीजिएगा...
यू चुप रहके सज़ा ना दीजिएगा...
ना दे सके ख़ुशी, तो ग़म ही सही...
पर दोस्त बना के यूही भुला ना दीजिएगा...
खुदा ने दोस्त को दोस्त से मिलाया...
दोस्तो के लिए दोस्ती का रिस्ता बनाया...
पर कहते है दोस्ती रहेगी उसकी क़ायम...
जिसने दोस्ती को दिल से निभाया...
अब और मंज़िल पाने की हसरत नही...
किसी की याद मे मर जाने की फ़ितरत नही...
आप जैसे दोस्त जबसे मिले...
किसी और को दोस्त बनाने की ज़रूरत नही
यू चुप रहके सज़ा ना दीजिएगा...
ना दे सके ख़ुशी, तो ग़म ही सही...
पर दोस्त बना के यूही भुला ना दीजिएगा...
खुदा ने दोस्त को दोस्त से मिलाया...
दोस्तो के लिए दोस्ती का रिस्ता बनाया...
पर कहते है दोस्ती रहेगी उसकी क़ायम...
जिसने दोस्ती को दिल से निभाया...
अब और मंज़िल पाने की हसरत नही...
किसी की याद मे मर जाने की फ़ितरत नही...
आप जैसे दोस्त जबसे मिले...
किसी और को दोस्त बनाने की ज़रूरत नही
Saturday, June 19, 2010
याद आता है
जब कभी गुजरा जमाना याद आता है, बना मिटटी
का अपना घर पुराना याद आता है। वो पापा से
चवन्नी रोज मिलती जेब खरचे को, वो अम्मा
से मिला एक आध-आना याद आता है। वो छोटे भाई
का लडना, शाम को फिर
भूल जाना याद आता है। वो घर के सामने की
अधखुली खिङकी अभी भी है, वहाँ पर छिप कर
किसी का मुस्कुराना याद आता है |
का अपना घर पुराना याद आता है। वो पापा से
चवन्नी रोज मिलती जेब खरचे को, वो अम्मा
से मिला एक आध-आना याद आता है। वो छोटे भाई
का लडना, शाम को फिर
भूल जाना याद आता है। वो घर के सामने की
अधखुली खिङकी अभी भी है, वहाँ पर छिप कर
किसी का मुस्कुराना याद आता है |
Saturday, June 5, 2010
विश्व पर्यावरण दिवस
आज विश्व पर्यावरण दिवस है.

जब हम होली,दिवाली,ईद और कई दूसरे उत्सव में तो बढ़ चढ़ के उत्साह दिखाते हैं पर जब बात पर्यावरण की करते हैं चाहे वो ग्लोबल वार्मिंग,हो या एड्स,जहाँ मानवता पहले आनी चाहिए वहां हम कभी भाग नहीं लेते.
आइये हम सब मिलके एक छोटी सी कोशिश करते हैं इस धरा को बचाने की.क्योकि कोशिशें कामयाब हो जाती हैं.
आप और हम जो भी कर सकते है वो भी किसी न किसी रूप में एक बहुत बड़ा योगदान होगा.
जब हम होली,दिवाली,ईद और कई दूसरे उत्सव में तो बढ़ चढ़ के उत्साह दिखाते हैं पर जब बात पर्यावरण की करते हैं चाहे वो ग्लोबल वार्मिंग,हो या एड्स,जहाँ मानवता पहले आनी चाहिए वहां हम कभी भाग नहीं लेते.
आइये हम सब मिलके एक छोटी सी कोशिश करते हैं इस धरा को बचाने की.क्योकि कोशिशें कामयाब हो जाती हैं.
आप और हम जो भी कर सकते है वो भी किसी न किसी रूप में एक बहुत बड़ा योगदान होगा.
Friday, May 28, 2010
Chintu ki kavita
Pareshaan thi Chintu ki wife
Non-happening thi jo uski life
Chintu ko na milta tha aaram
Office main karta kaam hi kaam
Chintu ke boss bhi the bade cool
Promotion ko har baar jate the bhul
Par bhulte nahi the wo deadline
Kaam to karwate the roz till nine
Chintu bhi banna chata tha best
Isliye to wo nahi karta tha rest
Din raat karta wo boss ki gulami
Onsite ke ummid main deta salami
Din guzre aur guzre fir saal
Bura hota gaya Chintu ka haal
Chintu ko ab kuch yaad na rehta tha
Galti se Biwi ko Behenji kehta tha
Aakhir ek din Chintu ko samjh aaya
Aur chod di usne Onsite ki moh maya
Boss se bola, "Tum kyon satate ho ?"
"Onsite ke laddu se buddu banate ho"
"Promotion do warna chala jaunga"
"Onsite dene par bhi wapis na aunga"
Boss haans ke bola "Nahi koi baat"
"Abhi aur bhi Chintus hai mere paas"
"Yeh duniya Chintuon se bhari hai"
"Sabko bas aage badhne ki padi hai"
"Tum na karoge to kisi aur se karunga"
"Tumhari tarah Ek aur Chintu banaunga"
(Jaago CHINTU Jaago!)
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